दुर्ग :सतबहनिया मंदिर हत्याकांड: टंगिया-त्रिशूल से हत्या, शव जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश… 3 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

हेडलाइन : रसमड़ा मंदिर में अधजली लाश की गुत्थी सुलझी: सेवादार ने नशे में युवक को उतारा मौत के घाट, दुर्ग कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

दुर्ग जिले के रसमड़ा स्थित सतबहनिया मंदिर में 30 जुलाई 2023 को मिली अधजली लाश के चर्चित हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने फैसला सुना दिया है। सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजुर की अदालत ने मंदिर के सेवादार रामचरण चन्द्राकर को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि आरोपी ने मुकेश उर्फ राजू की टंगिया और त्रिशूल से बेरहमी से हत्या की और बाद में शव को जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश की।

पूजा करने पहुंचे लोगों ने देखा भयावह मंजर

घटना 30 जुलाई 2023 की दोपहर करीब 3:30 बजे की है। सूचनाकर्ता रामनारायण मिश्रा अपने साथी कृष्णा साहू के साथ रसमड़ा स्थित मंदिर में पूजा-पाठ करने पहुंचे थे। इसके बाद जब वे सतबहनिया मंदिर की ओर गए तो वहां का दृश्य देखकर सन्न रह गए।

मंदिर के मंच पर एक व्यक्ति जलती हालत में पड़ा था। उसके सिर के पास त्रिशूल रखा हुआ था और आसपास खून फैला था। शव का चेहरा बुरी तरह जल चुका था, जिससे पहचान करना मुश्किल हो रहा था। दोनों ने घबराकर तत्काल डायल-112 को सूचना दी।

मौके पर पहुंची पुलिस ने शुरुआती जांच में ही हत्या की आशंका जताई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला हत्या का राज

मामले की जांच के दौरान शव को मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव भेजा गया। पोस्टमार्टम में सामने आया कि मृतक की मौत जलने से नहीं बल्कि धारदार हथियार से किए गए हमले से हुई थी।

मंदिर का सेवादार ही निकला कातिल

जांच में पुलिस को मंदिर के सेवादार रामचरण चन्द्राकर पर संदेह हुआ। घटना के बाद से वह लगातार फरार था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ रहा था।

जांच में सामने आया कि 27 जुलाई 2023 को आरोपी और मृतक राजू की पहचान साल्हेकसा में हुई थी। इसके बाद दोनों का संपर्क बना रहा। घटना वाले दिन दोनों नशे की हालत में मंदिर परिसर में थे। राजू वहां मछली खा रहा था, जिसे लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया।

देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि रामचरण ने टंगिया और त्रिशूल से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

हत्या के बाद शव जलाया, फिर कोयला ट्रेन से भाग निकला

हत्या के बाद आरोपी ने शव को जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश की। पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात के बाद रामचरण टंगिया को मंदिर के पास झाड़ियों में छिपाकर रेलवे ट्रैक की ओर भाग गया।

वह कोयले से भरी मालगाड़ी में चढ़कर मुढ़ीपार पहुंचा और वहां से लोकल ट्रेन पकड़कर रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गया। रायपुर में वह दिन में मजदूरी करता था और रात रेलवे स्टेशन में बिताता था।

5 महीने बाद हुआ गिरफ्तार

पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी परिवार से मिलने शक्तिनगर आया हुआ है। इसके बाद पुलिस ने ग्रीन चौक के पास उसे करीब 5 महीने बाद 8 जनवरी 2024 को गिरफ्तार कर लिया।

घटनास्थल से मिले थे कई अहम सबूत

पुलिस ने मौके से खून से सनी मिट्टी, राख, टूटा हुआ त्रिशूल, खून लगे कपड़े, मोटरसाइकिल और आरोपी का फटा आधार कार्ड जब्त किया था। बाद में आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर हत्या में इस्तेमाल टंगिया भी बरामद किया गया।

अदालत ने माना कि घटनास्थल से मिले सबूत, मेडिकल रिपोर्ट, आरोपी की फरारी और बरामद हथियार परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी श्रृंखला बनाते हैं जो आरोपी के अपराध को साबित करती है।

कोर्ट बोला- अपराध गंभीर, लेकिन “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” नहीं

सजा के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत से मृत्युदंड की मांग की। लोक अभियोजक एम.के. दिल्लीवार ने तर्क दिया कि आरोपी ने बेहद क्रूर तरीके से हत्या की और साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया।

वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुदर्शन महलवार ने कहा कि आरोपी का यह पहला अपराध है और वह आदतन अपराधी नहीं है, इसलिए नरमी बरती जानी चाहिए।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि:

”आजीवन कारावास सामान्य नियम है और मृत्युदंड अपवाद। वर्तमान मामला गंभीर है, लेकिन इसे विरल से विरलतम श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।”

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए नरमी नहीं बरती जा सकती।

आरोपी को उम्रकैद की सजा

सत्र न्यायालय ने आरोपी रामचरण चन्द्राकर को धारा 302 IPC के तहत आजीवन कारावास और 1000 रुपए अर्थदंड एवं धारा 201 IPC के तहत 5 वर्ष सश्रम कारावास और 1000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

कोर्ट ने आरोपी को सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल दुर्ग भेजने का आदेश दिया है।

ढाई साल बाद मिला इंसाफ

रसमड़ा का सतबहनिया मंदिर हत्याकांड उस समय जिले के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया था। मंदिर परिसर में अधजली लाश मिलने से सनसनी फैल गई थी। अब करीब ढाई साल बाद अदालत के फैसले ने इस रहस्यमयी हत्या की गुत्थी पर कानूनी मुहर लगा दी है।

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