दुर्ग। मेसर्स रिद्धि सिद्धि बिल्डर द्वारा निवेश के बदले फ्लैट देने और निर्माण तक जमा रकम पर ब्याज देने का झांसा देकर प्रार्थियों के साथ धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो रकम लौटाई गई, न ब्याज दिया गया और न ही फ्लैट का निर्माण कर कब्जा सौंपा गया।
परेशान होकर प्रार्थियों ने न्यायालय की शरण ली, जिसके आदेश पर कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 318 (4), 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, रितेश जैन ने बताया कि रूपेश जैन, विश्वास गुप्ता, मनीष शर्मा, सजल जैन, श्रीमती अमृता खंडेलवाल और कांतिलाल बोथरा ने वर्ष 2011 में उनसे 24.50 लाख रुपये निवेश के नाम पर लिए थे। अन्य आवेदकों से भी बड़ी रकम ली गई थी। आरोपियों ने आश्वासन दिया था कि फ्लैट निर्माण से पहले तक राशि पर ब्याज दिया जाएगा।
बताया गया कि वर्ष 2018 तक ब्याज का भुगतान किया गया, लेकिन इसके बाद न तो ब्याज दिया गया और न ही फ्लैट का कब्जा सौंपा गया। आरोप है कि बिल्डर के पार्टनरों ने धोखाधड़ी करते हुए निवेश की गई रकम और जमीन का आपस में बंटवारा कर लिया।
इस मामले में पदम जैन, श्रीमती रेणु देवी जैन, श्रीमती रुपाली जैन और श्रीमती आरती जैन (पति रितेश जैन) ने न्यायालय में परिवाद दायर किया था। पूर्व में थाना और पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर अंततः न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज हुआ है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।