भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों द्वारा परिवादी के विरुद्ध विभागीय जांच प्रारंभ की थी कि परिवादी ने हाउस एलॉटमेंट रूल्स का उल्लंघन किया है एवं गलत जानकारी देकर सतर्कता अधिकारी को गुमराह किया है। इस मामले में परिवादी सतेन्द्रा विराज निवासी सेक्टर 8 ने न्यायालय में परिवाद दायर कर भिलाई स्टील प्लांट के सहायक महाप्रबंधक सतर्कता हिमांशु दवे, जांच अधिकारी एवं महाप्रबंधक नीरज वारबर, सत्य वताकर अतिरिक्त मुख्य सतर्कता अधिकारी,सुनील सिंघल वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सतर्कता अधिकारी, राकेश कुमार कार्यकारी निदेशक सभी कार्यालय इस्पात भवन भिलाई स्टील प्लांट के विरुद्ध उन्हें जबरन परेशान किए जाने एवं विभागीय जांच करवा कर मेजर पनिशमेंट दिलाए जाने की धमकी दी जाती रही। सत्य वताकर ने परिवादी को जाति से संबंधित गलत शब्दों का प्रयोग भी किया था एवं परिवादी के बैंक अकाउंट स्टेटमेंट तक निकलवाने की धमकी दी थी। परिवादी एवं उसकी पत्नी का आईडीबीआई बैंक शाखा प्रियदर्शनी परिसर नेहरू नगर के खाता का विधि विपरीत तरीके से स्टेटमेंट निकालकर विभागीय जांच में पेश किया गया था। बैंक अकाउंट स्टेटमेंट बिना परिवादी एवं उसकी पत्नी के सहमति से प्राप्त किया गया था। इस तरह कई नियमों का उल्लंघन कर परिवादी को प्रताड़ित अधिकारियों द्वारा किया गया था। आरोपी गणों के विरुद्ध धारा 198, 201, 127(2), 316(2), 316(5), 318( 4)329(1), 340( 2), 3 (5), 361(2), भारतीय न्याय संहिता 2023 धारा 34 (ए), 72 (ए) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 एवं धारा 3(1)(आर)(एस), 3(2)(वी) अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने बाबत परिवाद प्रस्तुत किया था। विशेष न्यायाधीश दुर्ग के विनोद कुजूर एससी एसटी कोर्ट ने आदेश दिया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के अनुसार किसी अपराध का संज्ञान मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त को सुनवाई का अवसर दिया दिए बिना नहीं किया जाएगा। अतः परिवादी द्वारा तीन दिवस के भीतर आदेशित शुल्क एवं आवेदन की प्रति जमा करने पर अनावेदक गण- अभियुक्त गण को साधारण या रजिस्टर्ड डाक से नोटिस जारी किया जावे।