दुर्ग। दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की महामंत्री निकिता मिलिंद ने केंद्र की भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 2023 में महिला आरक्षण कानून पारित कर 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का दावा तो किया, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर टाल दिया गया है।
निकिता मिलिंद ने कहा कि यदि सरकार की मंशा साफ होती तो वर्तमान 543 लोकसभा सीटों में ही लगभग 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती थीं। उनका आरोप है कि ऐसा करने से कई मौजूदा नेताओं की राजनीतिक स्थिति प्रभावित होती, इसलिए सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिससे सभी पक्षों को संतुष्ट रखा जा सके।
उन्होंने पंचायत स्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगहों पर महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिजन निर्णय लेते हैं, जिसे आम बोलचाल में “प्रधान पति” मॉडल कहा जाता है। उनके अनुसार, यही व्यवस्था बड़े स्तर पर भी लागू होने का खतरा है, जहां महिलाओं के नाम पर प्रतिनिधित्व होगा लेकिन वास्तविक नियंत्रण पुरुषों के हाथ में रहेगा।
निकिता मिलिंद ने महिला सुरक्षा के मुद्दों का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि जमीनी स्तर पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में जनसंख्या और सीटों के आधार पर होने वाले बदलाव से क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि संसद में सीटों की संख्या बढ़ाने से बहस और निर्णय प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, यह पूरा मुद्दा 2029 के चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार की गई रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
अंत में उन्होंने कहा कि जनता को भावनात्मक मुद्दों में उलझाने के बजाय ठोस सुधारों की जरूरत है और महिला सशक्तिकरण को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
