छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासत तेज हो गई है। दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की महामंत्री निकिता मिलिंद ने इसे जल्दबाज़ी भरा कदम बताते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जारी प्रेस बयान में निकिता मिलिंद ने कहा कि बिना व्यापक जनसंवाद और सभी वर्गों की सहमति के यूसीसी लागू करने की दिशा में बढ़ना प्रदेश की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विविधता की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक बहु-सांस्कृतिक राज्य है, जहां आदिवासी, ग्रामीण और विभिन्न धार्मिक समुदायों की अपनी अलग परंपराएं और सामाजिक व्यवस्थाएं हैं।
कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि एक समान कानून थोपने का प्रयास इन परंपराओं को प्रभावित कर सकता है, जिससे समाज में असंतोष और असंतुलन पैदा होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि विभाजन पैदा करना।
निकिता मिलिंद ने सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर जल्दबाज़ी में निर्णय लेने के बजाय सभी समुदायों, धर्मगुरुओं, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक संवाद किया जाए। उनकी सहमति और सुझावों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में संवाद, सहमति और पारदर्शिता सर्वोपरि हैं, इसलिए वर्तमान स्वरूप में यूसीसी लागू करने का कांग्रेस विरोध करती है।