परिवार में प्रतिकूलता के बाद भी सब अनुकूलता के भाव के साथ रहे वहां शिव स्वयं वास करते हैं: आचार्य महेंद्र

ग्राम चिंगरी में शिव महापुराण कथा का चतुर्थ दिवस भक्ति की गहनता और जीवन के सूक्ष्म सत्यों से परिपूर्ण रहा। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल द्वारा आयोजित इस पावन श्रृंखला में कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने आज विभिन्न नारियों की भगवान प्राप्ति की भावनाओं और प्रयासों की दिव्य कथा सुनाई, जिससे श्रोताओं के हृदय में शिव भक्ति की नई ज्योति जागृत हुई।
महाराज जी ने भावपूर्ण ढंग से बताया कि सती, सीता, सबरी, स्वयंप्रभा और शूर्पणखा—ये सभी एक राशि वाली (एक ही भाव वाली) महिलाएं थीं, जिन्होंने भगवान को पाने की तीव्र इच्छा रखी। सभी ने भगवान प्राप्ति की कोशिश की, लेकिन प्रत्येक का मार्ग अलग-अलग था:
सती ने परीक्षा से (भगवान राम की परीक्षा लेकर अपनी भक्ति की पुष्टि करने की कोशिश से) भगवान को पाने का प्रयास किया। माता सीता ने इच्छा से (राम के प्रति अटूट प्रेम और मर्यादा की इच्छा से) भगवान को प्राप्त किया।
सबरी ने प्रतीक्षा से (भगवान राम के आने की प्रतीक्षा में वर्षों तक भक्ति और सेवा से) भगवान को पाया। स्वयंप्रभा ने बुद्धि से (ज्ञान और विवेकपूर्ण मार्ग से) भगवान प्राप्ति की।शूर्पणखा ने समीक्षा से (अपने प्रयासों की समीक्षा कर भक्ति की दिशा में परिवर्तन की कोशिश से) भगवान को पाने की कोशिश की, किंतु उसकी यह कोशिश नाकाम रही। महाराज जी ने गहनता से समझाया कि भगवान प्राप्ति का कोई एकमार्गी रास्ता नहीं होता—कभी परीक्षा, कभी इच्छा, कभी प्रतीक्षा, कभी बुद्धि, कभी समीक्षा के माध्यम से भक्त भगवान तक पहुंचने का प्रयास करता है। लेकिन सच्ची भक्ति में शुद्ध भाव, समर्पण और सही दिशा आवश्यक है। शूर्पणखा की नाकाम कोशिश से सीख मिलती है कि गलत मार्ग या अहंकारपूर्ण प्रयास भगवान प्राप्ति में बाधक बनते हैं।
इस कथा के माध्यम से महाराज जी ने उपदेश दिया कि जिस घर में प्रतिकूलता के बाद भी अनुकूलता हो, अर्थात विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मकता, धैर्य, भक्ति और सुमति बनी रहे, वहां जीवन सफल होता है और सुमति (सद्बुद्धि) का वास होता है। जैसे ये नारियां विभिन्न मार्गों से भगवान तक पहुंचने का प्रयास करती रहीं, वैसे ही जीवन की हर प्रतिकूलता में अनुकूलता ढूंढकर शिव भक्ति में लीन रहना चाहिए।
कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कई भक्तों ने महादेव से प्रार्थना की कि वे उन्हें भक्ति का सच्चा मार्ग दिखाएं, परीक्षा और समीक्षा के माध्यम से सही दिशा प्रदान करें, प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अनुकूलता दें और सुमति से जीवन को सफल बनाएं। यह दिवस विभिन्न नारियों की भक्ति-लीला, प्रयासों की विविधता और जीवन के गहन सत्य का अमृतमय स्मरण बन गया। कथा श्रृंखला दिन-प्रतिदिन भक्ति की गहराई बढ़ाती जा रही है

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