दुर्ग। पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के रायपुर नाका में रक्षाबंधन की शाम हुई चाकूबाजी की सनसनीखेज घटना ने इलाके की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बताया जा रहा है कि सतीश गुप्ता किसी विवाद का हिस्सा नहीं था। वह दो पक्षों के बीच हो रहे झगड़े को शांत कराने के लिए बीच-बचाव करने पहुंचा था, लेकिन इसी दौरान उस पर जानलेवा हमला कर दिया गया।
हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चाकू उसके सिर में धंस गया। घायल युवक को गंभीर हालत में निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
डायल 112 को कई बार सूचना, फिर भी समय पर नहीं पहुंची टीम?
स्थानीय लोगों का दावा है कि विवाद के दौरान डायल 112 पर कई बार पुलिस को सूचना दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस के समय पर मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच व्यस्त रायपुर नाका क्षेत्र में सड़क पर विवाद होने के बावजूद पुलिस की तत्काल मौजूदगी क्यों नहीं रही, यह जांच का अहम बिंदु है।
यदि आपात सूचना मिलने के बाद पुलिस समय रहते मौके पर पहुंचती, तो क्या विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता था? यह सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

घटना के अगले ही दिन थाना प्रभारी छुट्टी पर, सवाल और गहरे
इतनी गंभीर घटना के बाद पद्मनाभपुर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया के घटना के अगले ही दिन छुट्टी पर चले जाने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि छुट्टी पर जाना अपने आप में किसी अधिकारी की लापरवाही का प्रमाण नहीं है, लेकिन इतनी बड़ी कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना के तत्काल बाद थाना प्रभारी के अवकाश पर जाने की टाइमिंग को लेकर लोगों में चर्चा जरूर है।
अब सवाल यह भी है कि क्या थाना स्तर पर घटना की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलिंग और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था की समीक्षा की गई? क्या डायल 112 को मिली कॉल का रिकॉर्ड और रिस्पॉन्स टाइम जांच के दायरे में लिया गया? और क्या घटना से पहले पुलिस को विवाद की सूचना मिली थी?
जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी
पुलिस विभाग की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। यदि डायल 112 टीम या स्थानीय थाना स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक निर्दोष व्यक्ति दूसरों का विवाद शांत कराने पहुंचा और खुद जानलेवा हमले का शिकार हो गया—तो आखिर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था उस वक्त कहां थी?
इस मामले में पुलिस की जांच और डायल 112 के रिस्पॉन्स रिकॉर्ड से ही साफ होगा कि घटना के दौरान कहीं पुलिसिंग में चूक हुई थी या नहीं।
