दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला सीधे सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के अभिलेखों के अनुसार कार्यवाहक आयुक्त मोहेन्द्र साहू पर ₹50,000 का अर्थदंड दर्ज है।
इतना ही नहीं, आयोग की सूची यह भी बताती है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। नगर पालिक निगम दुर्ग के कई जनसूचना अधिकारियों पर अलग-अलग प्रकरणों में ₹5 हजार, ₹10 हजार, ₹13 हजार और अन्य राशियों के अर्थदंड भी लगाए जा चुके हैं। यानी RTI मामलों में दुर्ग निगम का नाम बार-बार आयोग की कार्रवाई में सामने आता रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दुर्ग निगम में सूचना का अधिकार कानून का पालन बार-बार सवालों के घेरे में क्यों आता है? क्या सूचना देने में लापरवाही एक व्यवस्था बन चुकी है, या जवाबदेही तय करने में कहीं कमी रह गई है?
अब जबकि नगर निगम में नियमित आयुक्त का पद भी लंबे समय से खाली है और कई प्रशासनिक कार्य लंबित बताए जा रहे हैं, ऐसे में सूचना आयोग की कार्रवाई ने निगम की कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है।
जनता पूछ रही है…
- आखिर RTI मामलों में बार-बार अर्थदंड क्यों?
- क्या इन मामलों में जिम्मेदारी तय हुई?
- क्या अर्थदंड की राशि संबंधित अधिकारियों से वसूल की गई?
- क्या भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे?
दुर्ग की जनता अब जवाब चाहती है, क्योंकि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी प्रशासन की सबसे बड़ी पहचान होती है।

