बोरसी का पुलिस सहायता केंद्र बना ‘सफेद हाथी’, शिकायत लेकर लौट रहे लोग

अपराधों पर लगाम कसने और आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के उद्देश्य से खोली गई पुलिस सहायता केंद्र अब महज ‘सफेद हाथी’ साबित हो रही हैं।

दुर्ग के पद्मनाभपुर थाना अंतर्गत बोरसी कॉलोनी (वार्ड नंबर 51) में कुछ महीने पहले ही बड़े जोर-शोर से पुलिस सहायता केंद्र का शुभारंभ किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि बोरसी और उसके आसपास के रहवासियों को छोटी-बड़ी शिकायतों के लिए पद्मनाभपुर थाना न दौड़ना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही उनकी समस्याओं का समाधान हो सके। लेकिन पुलिस विभाग का यह सराहनीय कदम अब पूरी तरह से निरर्थक साबित होता नजर आ रहा है।शुरुआत में पुलिस विभाग द्वारा इस केंद्र को नियमित रूप से संचालित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई थी। परंतु वर्तमान स्थिति यह है कि इस सहायता केंद्र के दरवाजे पर अमूमन ताला ही लटका रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी वे अपनी किसी शिकायत या समस्या को लेकर इस केंद्र पर पहुंचते हैं, तो उन्हें वहां ताला बंद मिलता है। ऐसा बहुत ही कम होता है जब यह केंद्र खुला दिखाई दे। इसके चलते क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।बोरसी क्षेत्र के रहवासियों ने बताया कि पिछले कुछ समय में कॉलोनी और उसके आसपास के कई घरों में चोरी की वारदातें हो चुकी हैं। अभी कुछ दिनों पहले ही बाजार चौक में देर शाम कार सवार लोगों को हथियार दिखाकर डराया-धमकाया गया और उनसे वसूली का प्रयास किया गया। यही नहीं, क्षेत्र में देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे स्थानीय लोग असुरक्षित महसूस करते हैं।

जागरूक लोगों ने का कहना है कि कोतवाली और मोहन नगर थाना क्षेत्रों में भी इसी तरह के पुलिस सहायता केंद्रों की शुरुआत की गई थी, जहां वर्तमान में सुचारू रूप से कार्य हो रहा है और वहां पुलिसकर्मियों की तैनाती भी रहती है।

इसके विपरीत, बोरसी केंद्र पूरी तरह से सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। केंद्र के उद्घाटन के समय दावा किया गया था कि यहां 24 घंटे पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे और जनता को तत्काल सहायता मिलेगी, लेकिन जमीनी हकीकत में यह दावा सिर्फ एक दिखावा साबित हो रहा है।

इस पूरे मामले पर नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) दुर्ग, हर्षित मैहर ने कहा कि इस सहायता केंद्र को 24 घंटे चालू रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उन्होंने भी स्वीकार किया कि केंद्र के अक्सर बंद रहने की शिकायतें पहले भी मिल चुकी हैं। इस संबंध में अधीनस्थ अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी और जल्द ही व्यवस्था में सुधार कर आम जनता की परेशानियों को दूर किया जाएगा।

यदि पुलिस सहायता केंद्र इसी तरह बंद पड़े रहे, तो पद्मनाभपुर क्षेत्र की जनता आखिर किसके भरोसे रहे? किसी बड़ी घटना या दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी कौन लेगा? हाल ही में हुए चर्चित हत्याकांड में भी थाना प्रभारी के मौके पर नहीं पहुंचने पर सीएसपी दुर्ग द्वारा उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था।”

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