क्राइम रिपोर्टर | दुर्ग
दुर्ग के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र स्थित कुंदरापारा में रविवार रात हुए सनसनीखेज हत्याकांड ने शहर की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि दुर्ग पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर हत्या के आरोप में एक ही परिवार के छह लोगों को गिरफ्तार कर मामले के खुलासे का दावा किया है, लेकिन इस पूरी घटना में कई ऐसे पहलू सामने आए हैं जो तथाकथित “स्मार्ट पुलिसिंग” की हकीकत उजागर करते हैं।

पुलिस के अनुसार, लिस्टेड बदमाश लेखराम कोठारी रविवार रात अपने साथियों अक्षय कोठारी, गोपा उर्फ सूर्यदेव और बल्ला उर्फ रोशन कोठारी के साथ जैतखाम के पास पहुंचा था। पुलिस का दावा है कि तीन वर्ष पुराने झंडा विवाद और हाल ही में जेल भेजे जाने की रंजिश के चलते दोनों पक्ष आमने-सामने आए। इसके बाद लक्ष्मी चेलक, आकाश चेलक, सत्यम चेलक, खेलू चेलक, प्रकाश चेलक और देवचंद चेलक ने लाठी, डंडे, ईंट और चाकू से हमला कर दिया। हमले में लेखराम कोठारी की मौत हो गई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद पुलिस ने एफएसएल टीम की सहायता से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और सोमवार सुबह तक सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से वारदात में प्रयुक्त ईंट, डंडे, चाकू और खून से सने कपड़े भी बरामद किए गए।
अस्पताल से भागा आरोपी, फिर दोबारा पकड़ाया
घटना में घायल आरोपी लक्ष्मी चेलक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर अस्पताल से फरार हो गया। बाद में पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया। अस्पताल से आरोपी का फरार होना भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
थाना प्रभारी की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, रविवार रात हुई इतनी बड़ी वारदात के बावजूद थाना प्रभारी समय पर घटनास्थल नहीं पहुंचे। सोमवार को ई-साक्ष्य और अन्य प्रक्रिया के दौरान उनके मौके पर पहुंचने की बात सामने आई। इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा थाना प्रभारी से जवाब-तलब किए जाने की चर्चा है। यदि विभागीय स्तर पर इसकी पुष्टि होती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
शनिवार के विवाद को गंभीरता से लिया जाता तो शायद बच जाती जान
पुलिस जांच में सामने आया कि शनिवार रात गुटखा दुकान पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद दोनों गुटों ने एक-दूसरे के घरों में तोड़फोड़ भी की और थाने पहुंचे। उस समय पुलिस ने लेखराम के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर जेल भेजा था। सवाल यह उठ रहा है कि यदि उसी समय दोनों पक्षों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती, तो क्या रविवार की हत्या टाली जा सकती थी?
घनी आबादी में चलता रहा खूनी संघर्ष
रविवार रात करीब 9:30 बजे, जब अधिकांश लोग अपने घरों में परिवार के साथ थे, उसी समय कुंदरापारा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में खुलेआम खूनी संघर्ष चलता रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लोग घरों से बाहर तो निकले, लेकिन भय के कारण कोई हस्तक्षेप करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। यह स्थिति क्षेत्र में अपराधियों के खौफ और आम लोगों की असुरक्षा की भावना को भी उजागर करती है।
पुलिस का पक्ष
दुर्ग पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई, एफएसएल टीम की मदद से साक्ष्य जुटाए गए और महज 12 घंटे के भीतर सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया गया। पुलिस का दावा है कि मामले की जांच जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

एक ओर पुलिस की त्वरित गिरफ्तारी की कार्रवाई है, तो दूसरी ओर समय रहते विवाद नहीं रोक पाने, घटना के दौरान पुलिस की मौजूदगी, अस्पताल से आरोपी के फरार होने और थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल भी हैं। कुंदरापारा हत्याकांड ने एक बार फिर शहर की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है।
