
मृतक 👆
12 तारीख को दुर्ग में हुए गैंगवार में एक युवक की हत्या हो गई। इस हत्याकांड में पद्मनाभपुर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया की गंभीर लापरवाही सामने आई है, क्योंकि यदि उन्होंने एक दिन पहले ही दोनों पक्षों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की होती, तो शायद यह गैंगवार और लेखराम कोठारी की हत्या नहीं होती।

आरोपी👆👆👆
इस घटना के बाद दुर्ग अधीक्षक (CSP) हर्षित मेहर ने थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया को उनके कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने के कारण कड़े शब्दों में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में थाना प्रभारी की चार बड़ी खामियों को सिलसिलेवार तरीके से रेखांकित किया गया है।सबसे पहली बात तो यह कि इतनी बड़ी हत्या की वारदात होने के बाद भी थाना प्रभारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी यानी CSP को इसकी कोई सूचना नहीं दी। इसके बाद, घटनास्थल से मृतक के शव को मर्चरी (शवगृह) भिजवाने की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और खुद CSP को मौके पर पहुंचकर शव को शिफ्ट कराना पड़ा।

लापरवाही का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका; गैंगवार के बाद जब दोनों पक्षों के घायल लोगों को डॉक्टरी जांच के लिए अस्पताल भेजा गया, तब पुलिस की ढील के कारण अस्पताल से एक आरोपी लक्ष्मी चेलक फरार हो गया। हालांकि, गनीमत यह रही कि क्राइम ब्रांच की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए उसे दोबारा पकड़ लिया।इस पूरे विवाद की जड़ में थाना प्रभारी की वह सबसे बड़ी चूक रही जो उन्होंने हत्या वाले दिन सुबह ही की थी। दरअसल, वारदात वाले दिन सुबह 4 बजे ही दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी और दोनों पक्ष थाने भी पहुंचे थे। इस मामले में तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जानी चाहिए थी, लेकिन थाना प्रभारी ने सिर्फ घायलों का मुलाहजा कराया और महज एक सामान्य प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करके छोड़ दिया, जबकि गंभीर धाराओं में एफआईआर बहुत देर से दर्ज की गई।

इतना ही नहीं, सुबह हुई इस हिंसक झड़प की जानकारी भी थाना प्रभारी ने CSP को नहीं दी और न ही समय रहते उचित कानूनी कदम उठाए। इसी ढिलाई की वजह से दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता चला गया और आखिरकार उसने एक खूनी गैंगवार का रूप ले लिया।फिलहाल, CSP द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब यह देखना बेहद अहम होगा कि लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारी के खिलाफ विभाग आगे क्या ठोस कार्रवाई करता है।